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आईआईटी कानपुर की नई कम्प्यूटेशनल टूल “Renoir” कोशिकाओं के बीच होने वाली बातचीत को सुनकर कैंसर प्रगति और अंगों के विकास में छिपे संकेतों को उजागर करता है

Computational Tool Renoir

आईआईटी कानपुर की नई कम्प्यूटेशनल टूल “Renoir” कोशिकाओं के बीच होने वाली बातचीत को सुनकर कैंसर प्रगति और अंगों के विकास में छिपे संकेतों को उजागर करता है

Kanpur , 7 May 2026

Source: Information and Media Outreach Cell, IIT Kanpur

कानपुर, 07 मई, 2026: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर (IIT Kanpur) के शोधकर्ताओं ने, प्रो. हमीम ज़फ़र के नेतृत्व में, “Renoir” नामक एक उन्नत कम्प्यूटेशनल टूल विकसित किया है, जो वैज्ञानिकों को यह समझने में सक्षम बनाता है कि जटिल ऊतकों (tissues) के भीतर कोशिकाएं आपस में कैसे संवाद करती हैं। Nature Communications में प्रकाशित इस अध्ययन में एक नई विधि प्रस्तुत की गई है, जो यह दर्शाती है कि कोशिकाओं के बीच होने वाले सिग्नल्स किस प्रकार विशेष स्थानिक (spatial) संदर्भ में जीन गतिविधि को प्रभावित करते हैं—जो अब तक जैव-चिकित्सा अनुसंधान में एक बड़ी चुनौती रही है।

शरीर के हर अंग का कार्य कोशिकाओं के निरंतर संवाद पर निर्भर करता है। कोशिकाएं ऊतक विकास, प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया और रोग की प्रगति जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं के समन्वय के लिए लगातार संकेतों का आदान-प्रदान करती रहती हैं। हालांकि हाल की तकनीकों से ऊतकों में जीन गतिविधि को मापा जा सकता है, लेकिन यह समझना अब तक कठिन रहा है कि एक कोशिका से प्राप्त संकेत दूसरी कोशिका के व्यवहार को वास्तव में कैसे प्रभावित करते हैं—विशेष रूप से ऊतकों की जटिल स्थानिक संरचना के भीतर।

Renoir इस चुनौती का समाधान स्पैटियल ट्रांसक्रिप्टोमिक्स डेटा का उपयोग करके करता है। यह डेटा जीन गतिविधि की उच्च-रिज़ॉल्यूशन प्रदान करता है, जिसमें प्रत्येक कोशिका का स्थान भी सुरक्षित रहता है। Renoir न केवल यह पहचानता है कि कौन-सी कोशिकाएं आपस में “बात” कर रही हैं, बल्कि यह भी दर्शाता है कि ये संकेत ऊतक के विशिष्ट स्थानों पर डाउनस्ट्रीम जीन्स को कैसे प्रभावित करते हैं। इससे शोधकर्ताओं को “कम्युनिकेशन नीश” (communication niches) की पहचान करने में मदद मिलती है, जहां विशेष सिग्नलिंग मार्ग सक्रिय होते हैं।

“Renoir के साथ, अब हम यह निर्धारित कर सकते हैं कि कोई विशिष्ट सिग्नलिंग इंटरैक्शन प्राप्त करने वाली कोशिकाओं में जीन गतिविधि को कैसे प्रभावित करता है,” प्रो. हमीम ज़फ़र, एसोसिएट प्रोफेसर, IIT कानपुर ने कहा, जिन्होंने इस अध्ययन का नेतृत्व किया। “यह विशेष रूप से कैंसर जैसी जटिल स्थितियों में रोग-प्रेरित संचार नेटवर्क की पहचान करने और अधिक सटीक उपचार लक्ष्यों की खोज के नए अवसर खोलता है।”

“हमने इस टूल का नाम Renoir फ्रांसीसी इंप्रेशनिस्ट कलाकार के नाम पर रखा, क्योंकि यह दो-आयामी ऊतक परिदृश्य में परस्पर क्रिया करने वाले जीन्स की गतिविधि को मानो ‘चित्रित’ करता है,” अध्ययन के प्रथम लेखक और IIT कानपुर के पूर्व एमएस छात्र नरेन राव ने कहा।

यह अध्ययन ऑस्ट्रेलिया के गार्वन इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल रिसर्च में प्रो. अंकुर शर्मा की प्रयोगशाला के साथ सहयोग में किया गया, जहां भ्रूणीय यकृत (fetal liver) और लिवर कैंसर से संबंधित स्पैटियल ट्रांसक्रिप्टोमिक्स डेटा तैयार किया गया, ताकि Renoir का मूल्यांकन किया जा सके। इस विधि ने जैविक रूप से महत्वपूर्ण अंतःक्रियाओं का सफलतापूर्वक खुलासा किया, जिनमें ट्यूमर की प्रगति और विकास प्रक्रियाओं से जुड़ी गतिविधियाँ शामिल हैं।

स्पैटियल ट्रांसक्रिप्टोमिक्स आधुनिक जीवविज्ञान की सबसे तेज़ी से विकसित होने वाली तकनीकों में से एक है, और Renoir दुनिया भर की प्रयोगशालाओं द्वारा उपयोग किए जाने वाले प्रमुख स्पैटियल-प्रोफाइलिंग प्लेटफॉर्म्स के साथ काम करता है। ऊतकों के विभिन्न हिस्सों में सक्रिय कोशिका-से-कोशिका संकेतों को उजागर करके, Renoir कैंसर जीवविज्ञान, विकासात्मक अनुसंधान और प्रिसीजन मेडिसिन में नई खोजों को तेज़ कर सकता है, जिससे अधिक लक्षित और प्रभावी उपचारों के विकास में सहायता मिल सकती है।

यह सॉफ़्टवेयर रिसर्च कम्यूनिटी के लिए github.com/Zafar-Lab/Renoir पर निःशुल्क उपलब्ध है।

संदर्भ: Rao, N., Kumar, T., Kazemi, D. et al. Charting spatial ligand-target activity using Renoir. Nat Commun 17, 3983 (2026). https://doi.org/10.1038/s41467-026-72388-7

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