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भा.प्रौ.सं.कानपुर

आईआईटी कानपुर के अध्ययन में सामने आया कि जल जीवन मिशन से ग्रामीण उत्तर प्रदेश में जीवन की गुणवत्ता में हुआ सुधार

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आईआईटी कानपुर के अध्ययन में सामने आया कि जल जीवन मिशन से ग्रामीण उत्तर प्रदेश में जीवन की गुणवत्ता में हुआ सुधार

Kanpur , 21 August 2026

Source: Information and Media Outreach Cell, IIT Kanpur

कानपुर , 21 अगस्त, 2026 : आईआईटी कानपुर द्वारा किए गए एक अध्ययन में पाया गया है कि जल जीवन मिशन ( JJM) के तहत घर-घर नल से जल उपलब्ध होने से उत्तर प्रदेश के देवीपाटन क्षेत्र के ग्रामीण परिवारों के जीवन की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। इससे पानी लाने में लगने वाला समय और मेहनत कम हुई है, जिससे परिवारों को घरेलू कार्यों, बच्चों की पढ़ाई, देखभाल और अन्य उपयोगी गतिविधियों के लिए अधिक समय मिल रहा है।

आईआईटी कानपुर के मानविकी और सामाजिक विज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर प्रदीप स्वर्णकार के नेतृत्व में किए गए इस अध्ययन में उत्तर प्रदेश के देवीपाटन क्षेत्र के गोंडा , बहराइच, श्रावस्ती और बलरामपुर जिलों में जल जीवन मिशन के प्रभाव का आकलन किया गया। अध्ययन के तहत 80 गांवों के लगभग 4,000 परिवारों का सर्वेक्षण किया गया, जिसमें प्रत्येक जिले के 20 गांव शामिल थे। अध्ययन में उद्धृत आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इन चारों जिलों में 97.11 प्रतिशत कार्यात्मक घरेलू नल कनेक्शन (एफएचटीसी) का लक्ष्य प्राप्त किया जा चुका है। वर्तमान में 4,672 गांवों के 15.18 लाख ग्रामीण परिवारों को कार्यशील नल कनेक्शन उपलब्ध हैं।

अध्ययन में शामिल अधिकांश परिवारों ने बताया कि घर पर नल से पानी मिलने के बाद उनके जीवन की गुणवत्ता में सुधार हुआ है। देवीपाटन क्षेत्र में कुल 75.8 प्रतिशत परिवारों ने जीवन स्तर में उल्लेखनीय सुधार की बात कही। यह आंकड़ा गोंडा में 77.7 प्रतिशत, बहराइच में 79.6 प्रतिशत, श्रावस्ती में 66.8 प्रतिशत और बलरामपुर में 78.7 प्रतिशत रहा।

पानी की आसान उपलब्धता का महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और कार्यभार पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। कुल 70.2 प्रतिशत परिवारों ने महिलाओं की सुरक्षा और गरिमा में उल्लेखनीय सुधार होने की बात कही। यह आंकड़ा गोंडा में 75 प्रतिशत, बहराइच में 72.9 प्रतिशत, श्रावस्ती में 62.1 प्रतिशत और बलरामपुर में 70.8 प्रतिशत रहा। वहीं, महिलाओं के कार्यभार में कमी गोंडा के 73.5 प्रतिशत, बहराइच के 79.2 प्रतिशत, श्रावस्ती के 68 प्रतिशत और बलरामपुर के 76.8 प्रतिशत परिवारों ने महसूस की।

घर पर नल से पानी मिलने के कारण बचा हुआ समय अब परिवार के विभिन्न उपयोगी कार्यों में लगा है। सर्वेक्षण के अनुसार, 63.6 प्रतिशत परिवार इस अतिरिक्त समय का उपयोग घरेलू कामों में कर रहे हैं, 45.8 प्रतिशत परिवार आराम और मनोरंजन के लिए तथा 34.2 प्रतिशत परिवार बच्चों और बुजुर्गों की देखभाल में इसका उपयोग कर रहे हैं। वहीं, 10.2 प्रतिशत परिवार इस समय का उपयोग आय बढ़ाने वाले कार्यों में कर रहे हैं, जबकि 0.7 प्रतिशत परिवार स्वयं की शिक्षा या कौशल विकास के लिए इसका उपयोग कर रहे हैं।

घरेलू नल कनेक्शन अब पीने के पानी का भी प्रमुख स्रोत बन चुके हैं। बलरामपुर के 90.9 प्रतिशत, गोंडा के 83.5 प्रतिशत, बहराइच के 83.2 प्रतिशत और श्रावस्ती के 72.5 प्रतिशत परिवार पीने के लिए नल के पानी का उपयोग कर रहे हैं। अध्ययन में यह भी सामने आया कि 99.1 प्रतिशत परिवारों में पिछले छह महीनों के दौरान जलजनित बीमारियों का कोई मामला सामने नहीं आया।

विश्वसनीय जल उपलब्धता से स्कूलों, आंगनवाड़ी केंद्रों और स्वास्थ्य संस्थानों में स्वच्छता एवं साफ-सफाई की व्यवस्था भी बेहतर हुई है। इसका सकारात्मक प्रभाव बालिकाओं की शिक्षा पर भी देखने को मिला है। अध्ययन के अनुसार, गोंडा में बालिकाओं की स्कूल उपस्थिति में 38.1 प्रतिशत, बहराइच में 17.4 प्रतिशत, श्रावस्ती में 15.1 प्रतिशत और बलरामपुर में 13.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

आईआईटी कानपुर के बारे में

1959 में स्थापित, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर को भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय महत्व के संस्थान के रूप में मान्यता प्राप्त है। विज्ञान, इंजीनियरिंग और अंतर्विषयी शिक्षा में उत्कृष्टता के लिए प्रसिद्ध, आईआईटी कानपुर अनुसंधान, नवाचार और शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। इसका 1,050 एकड़ का परिसर शैक्षणिक और अनुसंधान संसाधनों से समृद्ध है। संस्थान में विभिन्न विभाग, केंद्र, अंतर्विषयी कार्यक्रम और विशेष स्कूल हैं तथा 9,500 से अधिक छात्र और 570 से अधिक फ़ैकल्टी सदस्य हैं।

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