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भा.प्रौ.सं.कानपुर

आईआईटी कानपुर में उन्नत भारत अभियान के अंतर्गत सहभागी संस्थानों हेतु परिचयात्मक एवं विचार-मंथन सत्र का आयोजन

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आईआईटी कानपुर में उन्नत भारत अभियान के अंतर्गत सहभागी संस्थानों हेतु परिचयात्मक एवं विचार-मंथन सत्र का आयोजन

Kanpur , 30 March 2026

Source: Information and Media Outreach Cell, IIT Kanpur

कानपुर, 30 मार्च 2026:उन्नत भारत अभियान (यूबीए) के अंतर्गत सहभागी संस्थानों के लिए परिचयात्मक एवं विचार-मंथन सत्र का हाल ही में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर (आईआईटी कानपुर) में आयोजन किया गया। इस अवसर पर शैक्षणिक संस्थान, विकास सहयोगी, वित्तपोषण एजेंसियाँ तथा स्वयंसेवक एक मंच पर एकत्रित हुए और सहयोग एवं नवाचार के माध्यम से ग्रामीण विकास से संबंधित मुद्दों पर विचार-विमर्श किया। यह एक-दिवसीय कार्यशाला आईआईटी कानपुर से संबद्ध 17 से अधिक जिलों के 40 से अधिक संस्थानों की सहभागिता के साथ आयोजित की गई।

प्रेरणादायक संबोधन में यूबीए के समन्वयक प्रो. संदीप सांगल ने आईआईटी कानपुर में यूबीए की यात्रा साझा करते हुए प्रतिभागियों को व्यवहारिक सुझाव दिए। उन्होंने सभी भागीदारों से आग्रह किया कि वे गाँव स्तर पर विद्यालयी शिक्षा से जुड़ें। इससे स्वयंसेवकों और बच्चों को लाभ मिलेगा। यूबीए के सह-समन्वयक प्रो. सुधांशु एस. सिंह ने विभिन्न पहलों का विवरण प्रस्तुत करते हुए स्थानीय चुनौतियों के समाधान हेतु प्रौद्योगिकी, प्रशिक्षण और क्षमता संवर्धन की भूमिका पर ज़ोर दिया। अनुसंधान एवं विकास के सह-अधिष्ठाता प्रो. राजा अंगमुथु ने ग्रामीण क्षेत्रों में आईआईटी के छात्रों की सहभागिता के माध्यम से जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने की अपनी परिकल्पना साझा की।

व्यापक दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हुए उन्नत भारत अभियान के राष्ट्रीय समन्वयक प्रो. वीरेंद्र के. विजय (आईआईटी दिल्ली) ने बताया कि इससे जुड़े छात्र स्वयंसेवक स्थानीय संस्कृति को समझते हैं और ग्रामीण समुदायों की सहायता करते हैं। उन्होंने कहा कि ग्रामीण विद्यालयी शिक्षा में सुधार, कौशल विकास और स्थानीय अवसरों की उपलब्धता से गाँवों से पलायन को रोका जा सकता है तथा शहरी क्षेत्रों पर दबाव कम किया जा सकता है।

नाबार्ड द्वारा आईआईटी कानपुर के रंजीत सिंह रोज़ी शिक्षा केंद्र में विभिन्न ग्रामीण पहलों को समर्थन प्रदान किया गया है। नाबार्ड के डीडीएम, श्री राहुल यादव, ने सहभागी संस्थानों को इन पहलों में सक्रिय भागीदारी के लिए आमंत्रित किया। प्रथम एजुकेशन फाउंडेशन के श्री ओम प्रकाश ने उनके द्वारा संचालित कौशल विकास कार्यक्रमों की जानकारी दी, जो ग्रामीण युवाओं को रोजगार प्राप्त करने और आत्मनिर्भर भविष्य बनाने में सहायक हैं।

जीएचएस बैकुंठपुर की प्राचार्य डॉ. किरण प्रजापति ने विद्यालयी शिक्षा के क्षेत्र में आईआईटी कानपुर के छात्रों के निरंतर प्रयासों की सराहना करते हुए बताया कि इससे शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार हुआ है और बच्चों में उत्साह बढ़ा है।

सहभागी संस्थानों के प्रतिनिधियों ने अपने-अपने क्षेत्रों में किए जा रहे ग्राम-स्तरीय कार्यों की प्रस्तुतियाँ दीं। अपने संसाधनों के अनुसार उन्होंने स्वास्थ्य शिविर, विधिक जागरूकता, कौशल विकास तथा विभिन्न सामुदायिक पहलों को अपनाया है।

इंस्टीट्यूट ऑफ फाइन आर्ट्स, सीएसजेएमयू और आईआईटी कानपुर के संयुक्त प्रयास से पॉटरी पर एक कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें स्थानीय कुम्हारों और ललित कला के छात्रों ने भाग लिया। इस सहयोगात्मक पहल ने छात्रों को प्रेरित किया तथा स्थानीय कारीगरों के लिए नए अवसरों के द्वार खोले।

समग्र रूप से, इस सत्र ने सतत ग्रामीण परिवर्तन को आगे बढ़ाने और सार्थक आजीविका अवसरों के सृजन में साझेदारी की शक्ति को पुनः स्थापित किया।

आईआईटी कानपुर के बारे में

1959 में स्थापित, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर को भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय महत्व के संस्थान के रूप में मान्यता प्राप्त है। विज्ञान और इंजीनियरिंग शिक्षा में उत्कृष्टता के लिए प्रसिद्ध, आईआईटी कानपुर ने अनुसंधान और विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इसका 1,050 एकड़ का हरा-भरा परिसर शैक्षणिक और अनुसंधान संसाधनों से समृद्ध है। संस्थान में 20 विभाग, तीन अंतर्विषयी कार्यक्रम, 27 केंद्र और तीन विशेष स्कूल हैं, जो इंजीनियरिंग, विज्ञान, डिजाइन, मानविकी और प्रबंधन जैसे क्षेत्रों को समाहित करते हैं। 570 से अधिक पूर्णकालिक फैकल्टी और 9,500 से अधिक छात्रों के साथ, आईआईटी कानपुर नवाचार और शैक्षणिक उत्कृष्टता में अग्रणी बना हुआ है।