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एनएचए, आईसीएमआर–एनआईआरडीएचडीएस एवं आईआईटी कानपुर ने स्वास्थ्य एआई के लिए डिजिटल पब्लिक गुड पर राष्ट्रीय हैकाथॉन का किया आयोजन

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एनएचए, आईसीएमआर–एनआईआरडीएचडीएस एवं आईआईटी कानपुर ने स्वास्थ्य एआई के लिए डिजिटल पब्लिक गुड पर राष्ट्रीय हैकाथॉन का किया आयोजन

Kanpur , 24 January 2026

Source: Information and Media Outreach Cell, IIT Kanpur

फेडरेटेड इंटेलिजेंस हैकाथॉन ने सुरक्षित और वास्तविक-दुनिया के समाधान विकसित करने हेतु नवाचारकों को सशक्त बनाया

कानपुर, 24 जनवरी 2026: राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (एनएचए) ने आईसीएमआर–राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य एवं डेटा विज्ञान अनुसंधान संस्थान (NIRDHDS) और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर के सहयोग से ‘डिजिटल पब्लिक गुड (DPG) फॉर हेल्थ एआई’ पर फेडरेटेड इंटेलिजेंस हैकाथॉन का आयोजन किया। यह कार्यक्रम इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के पूर्व-आयोजन के रूप में 19 से 23 जनवरी 2026 तक आईआईटी कानपुर में आयोजित किया गया। यह राष्ट्रीय पहल भारत में स्वास्थ्य सेवाओं के लिए सुरक्षित, गोपनीयता-संरक्षण और स्केलेबल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस समाधानों के विकास को प्रोत्साहित करने पर केंद्रित रही।

यह हैकाथॉन आईआईटी कानपुर के शोधकर्ताओं द्वारा विकसित स्वास्थ्य एआई हेतु एक नए डिजिटल पब्लिक गुड (DPG) पर केंद्रित था, जो स्वास्थ्य संस्थानों, डेटा प्रदाताओं और एआई डेवलपर्स के बीच सहयोग को सक्षम बनाता है। फेडरेटेड लर्निंग, सुरक्षित मूल्यांकन पाइपलाइनों और ओपन बेंचमार्किंग मेकैनिज्म का उपयोग करते हुए यह प्लेटफ़ॉर्म डेटा गोपनीयता, संस्थागत नियंत्रण और भरोसे को सुनिश्चित करता है, साथ ही राष्ट्रीय स्तर पर नवाचार को बढ़ावा देता है।

इस राष्ट्रीय हैकाथॉन में डॉ. सुनील कुमार बरनवाल, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण, ने मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया। उन्होंने मुख्य भाषण दिया तथा विजेताओं को सम्मानित किया।

कुल 374 पंजीकरण प्राप्त हुए, जिनमें 208 व्यक्तिगत प्रतिभागी और 166 टीमें (दो या अधिक प्रतिभागियों की) शामिल थीं। लगभग 54 प्रतिशत प्रतिभागियों ने स्वयं को एआई शोधकर्ता या नवाचारक बताया। शेष प्रतिभागी हेल्थ-टेक स्टार्टअप्स, स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं, स्नातकोत्तर छात्रों, डेटा वैज्ञानिकों तथा अन्य विविध क्षेत्रों से थे।

हैकथॉन के अतिरिक्त, 23–24 जनवरी 2026 के दौरान डिजिटल हेल्थ स्टैक पर एक कार्यशाला का भी आयोजन किया गया।

इस अवसर पर संबोधित करते हुए राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. सुनील कुमार बरनवाल, आईएएस, ने कहा कि भारत का डिजिटल स्वास्थ्य पारितंत्र अंतःक्रियाशीलता, डेटा सुरक्षा तथा नागरिक-केंद्रित सेवाओं पर विशेष ध्यान देते हुए विकसित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य मिशन जैसे मंचों के माध्यम से भारत एक ऐसा मापनीय और समावेशी डिजिटल स्वास्थ्य अवसंरचना विकसित करने का लक्ष्य रखता है, जो रोगियों की गोपनीयता की रक्षा करते हुए नवाचार को समर्थन प्रदान करे।

सभा को संबोधित करते हुए चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की सचिव तथा एबीडीएम उत्तर प्रदेश की प्रबंध निदेशक श्रीमती ऋतु माहेश्वरी, आईएएस, ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं की सुदृढ़ आपूर्ति सुनिश्चित करने और देशभर में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं तक समान पहुंच उपलब्ध कराने के लिए स्वास्थ्य क्षेत्र में डिजिटल प्रौद्योगिकियों का एकीकरण अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने यह भी कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएँ हितधारकों के बीच जागरूकता और क्षमता निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, जिससे जमीनी स्तर पर डिजिटल सार्वजनिक स्वास्थ्य समाधानों को प्रभावी रूप से अपनाया जा सके।

आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रो. मणिन्द्र अग्रवाल ने स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए एआई-संचालित डिजिटल सार्वजनिक वस्तुओं के विकास में संस्थान के सतत प्रयासों पर प्रकाश डाला। उन्होंने सुरक्षित डेटा साझाकरण, सहयोगात्मक मॉडल विकास तथा भारत के डिजिटल हेल्थ स्टैक के माध्यम से पारितंत्र निर्माण के महत्व को रेखांकित किया, ताकि हेल्थ एआई समाधानों को जिम्मेदार और मापनीय रूप से अपनाया जा सके।

आईआईटी कानपुर के सेंटर फॉर डेवलपिंग इंटेलिजेंट सिस्टम्स के प्रो. निशीत श्रीवास्तव ने इस बात पर जोर दिया कि हेल्थ एआई को आगे बढ़ाने के लिए एक ऐसे सहयोगात्मक पारितंत्र का निर्माण आवश्यक है, जिसमें डेटा, मॉडल और एल्गोरिथ्मिक ऑडिट को सुरक्षित रूप से साझा किया जा सके। उन्होंने आगे बताया कि आईआईटी कानपुर द्वारा विकसित डिजिटल पब्लिक गुड (डीपीजी) मंच को इसी प्रकार के व्यापक स्तर पर सहयोग को सक्षम बनाने के उद्देश्य से अभिकल्पित किया गया है।

इस कार्यशाला में उत्तर प्रदेश सरकार के सूचना प्रौद्योगिकी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग की विशेष सचिव श्रीमती नेहा जैन, आईएएस तथा गैंगवाल स्कूल ऑफ मेडिकल साइंस एंड टेक्नोलॉजी के प्रमुख प्रो. संदीप वर्मा सहित अन्य गणमान्य व्यक्तियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। इन सभी ने भारत के डिजिटल स्वास्थ्य पारितंत्र को सुदृढ़ करने में नीति, प्रौद्योगिकी तथा अंतःविषयक सहयोग की भूमिका पर अपने विचार साझा किए।

भारत के हेल्थकेयर एआई पारिस्थितिकी तंत्र को अब भी उच्च-गुणवत्ता वाले डेटा की सीमित उपलब्धता, मानकीकृत बेंचमार्किंग की कमी तथा डेटा गवर्नेंस और सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इन्हीं चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए, स्वास्थ्य एआई के लिए डीपीजी प्लेटफ़ॉर्म को इस प्रकार डिज़ाइन किया गया है कि यह क्लिनिकल डेटा को रूपांतरित एवं मानकीकृत कर उपयोगी अंतर्दृष्टियों में बदल सके, जिससे शोधकर्ता डेटा स्वामित्व और गोपनीयता से समझौता किए बिना मजबूत एआई मॉडल विकसित और सत्यापित कर सकें। यह एआई डीपीजी वर्तमान में एनएचए में तैनात है और आईसीएमआर द्वारा उपयोग के लिए पायलट चरण में है।

मुख्य तिथियां एवं पुरस्कार

  • पंजीकरण अवधि: 28 दिसंबर 2025 – 7 जनवरी 2026
  • पूर्व-हैकाथॉन ओरिएंटेशन कार्यशालाएँ: 12 जनवरी एवं 14 जनवरी 2026
  • हैकाथॉन सप्ताह: 19–23 जनवरी 2026
  • पोस्ट-हैकाथॉन मूल्यांकन एवं पुरस्कार: 23–24 जनवरी 2026
  • कुल पुरस्कार राशि: ₹12 लाख

प्रतिभागियों ने तीन चिकित्सा ट्रैकों—बोन एज प्रेडिक्शन, कैटरेक्ट डिटेक्शन तथा डायबिटिक रेटिनोपैथी—के लिए एआई मॉडल विकसित और परिष्कृत किए। इन मॉडलों का मूल्यांकन ‘गोल्डन डेटासेट्स’ के विरुद्ध एक गोपनीयता-संरक्षण फेडरेटेड इंटेलिजेंस फ्रेमवर्क के माध्यम से किया गया, तथा सबसे सटीक मॉडलों का चयन किया गया। यह हैकाथॉन भारत के हेल्थ एआई हेतु डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) के लिए एक पायलट परियोजना के रूप में आयोजित किया गया।

हैकाथॉन की कार्यवाही इस प्रकार संरचित की गई थी कि प्रतिभागियों को हेल्थ एआई जीवनचक्र के प्रत्येक चरण में आधारभूत ज्ञान और उन्नत अंतर्दृष्टि प्राप्त हो सके। कार्यक्रम में तकनीकी सत्र, डेमोंस्ट्रेशन और विशेषज्ञ चर्चाएँ शामिल रहीं, जिनमें:

  • पारंपरिक मशीन लर्निंग विधियों का परिचय, जिससे हेल्थ एआई क्षेत्र में नए प्रतिभागियों को आधारभूत समझ प्राप्त हुई।
  • स्वास्थ्य एआई डीपीजी प्लेटफ़ॉर्म का प्रदर्शन, जिसमें इसकी फेडरेटेड लर्निंग क्षमताएँ, सुरक्षित मूल्यांकन पाइपलाइन और ओपन बेंचमार्किंग ढांचा प्रस्तुत किया गया।

कार्यशाला के दौरान हेल्थ एआई पर एक पैनल चर्चा भी आयोजित की गई, जिसमें निम्नलिखित प्रमुख विषयगत क्षेत्रों को शामिल किया गया:

  • एल्गोरिद्म के लिए हेल्थ टेक्नोलॉजी असेसमेंट (HTA): चुनौतियाँ और संभावित समाधान
  • भारत में हेल्थ एआई के लिए डेटा सोर्सिंग
  • एआई प्रणालियों का क्लिनिकल मूल्यांकन एवं नियामकीय पहलू
  • स्वास्थ्य सेवाओं में ज़िम्मेदार एआई प्रथाएँ

इसके अतिरिक्त, निम्नलिखित विषयों पर केंद्रित वैज्ञानिक व्याख्यान भी आयोजित किए गए:

  • भारत में कम्प्यूटेशनल पैथोलॉजी: वर्तमान चुनौतियाँ, उभरते अवसर और बड़े पैमाने पर अपनाने के मार्ग
  • हेल्थ एआई एवं कम्प्यूटेशनल पैथोलॉजी: वास्तविक-दुनिया के उपयोग-मामले और ट्रांसलेशनल प्रभाव
  • डिजिटल पब्लिक गुड के रूप में फेडरेटेड प्लेटफ़ॉर्म: राष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षित, गोपनीयता-संरक्षण और सहयोगात्मक एआई नवाचार को सक्षम बनाने में उनकी भूमिका

यह संरचना सैद्धांतिक समझ, व्यावहारिक अनुभव और नीति-केंद्रित संवाद का समग्र दृष्टिकोण प्रदान करती है, जिससे प्रतिभागी विकसित होते हेल्थ एआई पारिस्थितिकी तंत्र के साथ सार्थक रूप से जुड़ सके।

हैकाथॉन का समापन पुरस्कार वितरण समारोह के साथ हुआ, जिसमें बोन एज, कैटरेक्ट और डायबिटिक रेटिनोपैथी उपयोग-मामलों में उत्कृष्ट योगदान को सम्मानित किया गया। विजेताओं को नवाचार, तकनीकी उत्कृष्टता, वास्तविक-दुनिया में उपयोगिता और ज़िम्मेदार एआई प्रथाओं के पालन के लिए सम्मानित किया गया। पुरस्कार डॉ. सुनील कुमार बरनवाल, सीईओ, राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण, द्वारा प्रदान किए गए, जिन्होंने भारत में हेल्थ एआई को आगे बढ़ाने में इन योगदानों के महत्व को रेखांकित किया।

राष्ट्रीय प्रयास में योगदान देते हुए, इस आयोजन में स्वास्थ्य क्षेत्र में नैतिक और प्रभावशाली एआई के माध्यम से भविष्य को आकार देने के लिए प्रतिबद्ध अनेक हितधारकों की सक्रिय भागीदारी और सहयोग देखने को मिला। राष्ट्रीय संस्थानों, अकादमिक जगत, स्टार्टअप्स और स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं को एक मंच पर लाकर, फेडरेटेड इंटेलिजेंस हैकाथॉन भारत के लिए जिम्मेदार, भरोसेमंद और स्केलेबल हेल्थ एआई के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ। यह पहल रोगियों की गोपनीयता की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए बेहतर स्वास्थ्य परिणामों हेतु डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करती है।

आईआईटी कानपुर के बारे में

1959 में स्थापित, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर को भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय महत्व के संस्थान के रूप में मान्यता प्राप्त है। विज्ञान और इंजीनियरिंग शिक्षा में उत्कृष्टता के लिए प्रसिद्ध, IIT कानपुर ने अनुसंधान और विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इसका 1,050 एकड़ का हरा-भरा परिसर शैक्षणिक और अनुसंधान संसाधनों से समृद्ध है। संस्थान में 20 विभाग, तीन अंतर्विषयी कार्यक्रम, 27 केंद्र और तीन विशेष स्कूल हैं, जो इंजीनियरिंग, विज्ञान, डिजाइन, मानविकी और प्रबंधन जैसे क्षेत्रों को कवर करते हैं। 570 से अधिक पूर्णकालिक फैकल्टी और 9,500 से अधिक छात्रों के साथ, IIT कानपुर नवाचार और शैक्षणिक उत्कृष्टता में अग्रणी बना हुआ है।