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भा.प्रौ.सं.कानपुर
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पश्चिम अफ्रीका, यूरोप और अमेरिका के बाद, आईआईटी कानपुर–PAS शिखर सम्मेलन के माध्यम से जलवायु अनुकूलन पर वैश्विक संवाद पहुंचेगा भारत के गंगा के मैदानी क्षेत्र तक

Regional Rural India Summit

पश्चिम अफ्रीका, यूरोप और अमेरिका के बाद, आईआईटी कानपुर–PAS शिखर सम्मेलन के माध्यम से जलवायु अनुकूलन पर वैश्विक संवाद पहुंचेगा भारत के गंगा के मैदानी क्षेत्र तक

Kanpur/Lucknow , 22 October 2026

Source: Information and Media Outreach Cell, IIT Kanpur

कानपुर/लखनऊ, 22 अक्टूबर 2026: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर (आईआईटी कानपुर), पोंटिफिकल एकेडमी ऑफ साइंसेज (PAS) और पोंटिफिकल एकेडमी ऑफ सोशल साइंसेज (PASS), वेटिकन सिटी के साथ साझेदारी में, 3–4 नवंबर 2026 को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में ‘जलवायु समिट एवं अनुकूलन के लिए पुनर्योजी कृषि, जल और ऊर्जा पर ग्रामीण भारत क्षेत्रीय शिखर सम्मेलन’ का आयोजन करेगा। आईआईटी कानपुर में कोटक महिंद्रा बैंक के सहयोग से स्थापित कोटक स्कूल ऑफ सस्टेनेबिलिटी (KSS) के माध्यम से आयोजित यह शिखर सम्मेलन, विशेष रूप से गंगा के मैदानी क्षेत्र पर ध्यान केंद्रित करते हुए, जलवायु अनुकूलन क्षमता को मजबूत करने, कृषि की स्थिरता सुनिश्चित करने और ग्रामीण आजीविका को सुदृढ़ बनाने के लिए विज्ञान एवं नीति-आधारित उपायों पर चर्चा करेगा। भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री, माननीय श्री शिवराज सिंह चौहान, इस सम्मेलन के मुख्य अतिथि होंगे।

यह शिखर सम्मेलन ग्रामीण भारत के लिए एक महत्वपूर्ण समय पर आयोजित हो रहा है, जब बढ़ते तापमान, मानसून की अनिश्चितता, भूजल पर बढ़ता दबाव, मृदा क्षरण और, जल, ऊर्जा, जनस्वास्थ्य और आजीविका पर एक-दूसरे से जुड़ा दबाव बढ़ा रही हैं। सम्मेलन का उद्देश्य अलग-अलग क्षेत्रों तक सीमित समाधानों से आगे बढ़कर ऐसे समेकित दृष्टिकोण विकसित करना है, जो मृदा स्वास्थ्य, जल संरक्षण एवं प्रबंधन, स्वच्छ ऊर्जा, जलवायु-अनुकूल कृषि और सुदृढ़ ग्रामीण समुदायों को परस्पर जोड़ें।

यह शिखर सम्मेलन PAS और PASS की अंतरराष्ट्रीय जलवायु-अनुकूलन पहल का हिस्सा है, जो MAST रूपरेखा—शमन (Mitigation), अनुकूलन (Adaptation) और सामाजिक रूपांतरण (Societal Transformation)—पर आधारित है। वर्ष 2024 में वेटिकन में आयोजित PAS–PASS वैश्विक जलवायु अनुकूलन शिखर सम्मेलन के बाद, इस पहल के अंतर्गत अमेरिका के कैलिफोर्निया और मैसाचुसेट्स, नैरोबी, वियना, ब्रासीलिया और डकार सहित विभिन्न स्थानों पर क्षेत्रीय संवाद आयोजित किए गए हैं। भारत में आयोजित होने वाला यह शिखर सम्मेलन इस वैश्विक रूपरेखा को ग्रामीण भारत और गंगा के मैदानी क्षेत्र की विशिष्ट चुनौतियों के संदर्भ में आगे बढ़ाएगा।

सम्मेलन का एक प्रमुख विषय पुनर्योजी कृषि होगा, जिसे जलवायु अनुकूलन से आगे बढ़कर पारिस्थितिक पुनर्बहाली के एक प्रभावी माध्यम के रूप में देखा जा रहा है। इसके अंतर्गत मृदा स्वास्थ्य में सुधार, जल धारण क्षमता और भूजल पुनर्भरण को बढ़ावा देना, जैव विविधता का समावेश, संसाधनों का अधिक कुशल उपयोग तथा ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी जैसे पहलुओं पर चर्चा होगी। सम्मेलन में यह भी विचार किया जाएगा कि मृदा विज्ञान, जल विज्ञान, सटीक कृषि, स्वच्छ ऊर्जा और डिजिटल निगरानी के क्षेत्र में हुई प्रगति को किस प्रकार व्यापक स्तर पर लागू किए जा सकने वाले कृषि एवं जलवायु समाधानों में बदला जा सकता है।

दो दिवसीय कार्यक्रम में भारत और दुनिया भर के प्रमुख वैज्ञानिक, नीति-निर्माता, क्षेत्रीय कार्यकर्ता और नवप्रवर्तक भाग लेंगे। उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के साथ PAS के अध्यक्ष प्रो. जोआचिम वॉन ब्राउन; आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रो. मणीन्द्र अग्रवाल; भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी (INSA) के अध्यक्ष प्रो. शेखर मांडे; और आईआईटी कानपुर के कोटक स्कूल ऑफ सस्टेनेबिलिटी के डीन प्रो. सच्चिदानंद त्रिपाठी शामिल होंगे।

एक विशेष सत्र में पद्म भूषण से सम्मानित डॉ. अनिल प्रकाश जोशी, पद्म श्री से सम्मानित प्रो. अशोक गुलाटी और ‘जल पुरुष’ के नाम से प्रसिद्ध रेमन मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित डॉ. राजेंद्र सिंह अपने विचार साझा करेंगे। सम्मेलन में ‘MAST – जलवायु अनुकूलन के लिए एक सार्वभौमिक रूपरेखा’ विषय पर भी चर्चा होगी, जिसमें PAS की परिषद के सदस्य प्रो. वीरभद्रन रामनाथन और मैसाचुसेट्स विश्वविद्यालय, बोस्टन के चांसलर सहित PASS की परिषद के सदस्य प्रो. मार्सेल सुआरेज़-ओरोज़्को वीडियो संदेशों के माध्यम से योगदान देंगे।

अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों में प्रो. ओर्यन गुस्ताफसन, डॉ. आशीष झा, डॉ. सौम्या स्वामीनाथन, डॉ. रतन लाल, प्रो. सेसिलिया टोर्टाजाडा और प्रो. रघु मुरतुगुड्डे शामिल होंगे। वे मानसून विज्ञान, पुनर्योजी कृषि, जलवायु एवं जनस्वास्थ्य, जल सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा, जलवायु-प्रेरित पलायन तथा विज्ञान-नीति के भविष्यपरक आकलन जैसे विषयों पर चर्चा करेंगे। कार्यक्रम में समुदाय-आधारित अनुकूलन प्रयासों, महिलाओं के नेतृत्व वाली पहलों तथा उत्तर प्रदेश और बिहार के राज्य-स्तरीय अनुभवों को भी प्रमुखता दी जाएगी।

PAS के अध्यक्ष प्रो. जोआचिम वॉन ब्राउन ने कहा, “भारत MAST रूपरेखा को ऐसे क्षेत्र में लागू करने का एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है, जो कृषि और मानव जीवन की दृष्टि से अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। यह शिखर सम्मेलन वैश्विक विज्ञान को भारत के ज्ञान और जमीनी अनुभवों से जोड़ेगा, ताकि जलवायु अनुकूलन क्षमता और सतत आजीविका को मजबूत किया जा सके।”

आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रो. मणीन्द्र अग्रवाल, ने कहा, “ग्रामीण भारत के सामने मौजूद जलवायु संबंधी चुनौतियों के समाधान के लिए कृषि, जल और ऊर्जा के बीच अंतर्संबंधों की वैज्ञानिक समझ आवश्यक है। यह शिखर सम्मेलन वैश्विक विशेषज्ञता को भारत के वैज्ञानिक ज्ञान और क्षेत्रीय अनुभवों के साथ जोड़कर गंगा के मैदानी क्षेत्र के लिए व्यावहारिक एवं व्यापक स्तर पर लागू किए जा सकने वाले समाधान विकसित करने का प्रयास करेगा।”

आईआईटी कानपुर के कोटक स्कूल ऑफ सस्टेनेबिलिटी के डीन एवं सम्मेलन अध्यक्ष प्रो. सच्चिदा नंद त्रिपाठी ने कहा, “गंगा का मैदानी क्षेत्र जलवायु, कृषि, जल और आजीविका के परस्पर जुड़े पहलुओं के लिहाज से अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। इस शिखर सम्मेलन का उद्देश्य ऐसे समेकित उपाय विकसित करना है, जो ग्रामीण क्षेत्रों की जलवायु अनुकूलन क्षमता को मजबूत करने के साथ-साथ ग्रामीण समृद्धि के पारिस्थितिक आधार को भी पुनर्स्थापित करें।”

इस शिखर सम्मेलन से राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर नीतिगत निर्णयों तथा उनके क्रियान्वयन के लिए व्यावहारिक सुझाव प्राप्त होने की उम्मीद है। साथ ही, यह PAS और PASS के नेतृत्व में चल रहे वैश्विक जलवायु-अनुकूलन प्रयासों के साथ भारत के अनुभवों और समाधानों को जोड़ने के लिए एक महत्त्वपूर्ण मंच प्रदान करेगा।

आईआईटी कानपुर के बारे में

1959 में स्थापित, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर को भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय महत्व के संस्थान के रूप में मान्यता प्राप्त है। विज्ञान और इंजीनियरिंग शिक्षा में उत्कृष्टता के लिए प्रसिद्ध, आईआईटी कानपुर ने अनुसंधान और विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इसका 1,050 एकड़ का हरा-भरा परिसर शैक्षणिक और अनुसंधान संसाधनों से समृद्ध है। संस्थान में 21 विभाग, 27 केंद्र, तीन अंतर्विषयी कार्यक्रम और तीन विशेष स्कूल हैं, जो इंजीनियरिंग, विज्ञान, डिजाइन, मानविकी और प्रबंधन जैसे क्षेत्रों को समाहित करते हैं। 580 से अधिक पूर्णकालिक फैकल्टी और 9,500 से अधिक छात्रों के साथ, आईआईटी कानपुर नवाचार, अनुसंधान और समग्र विकास में अग्रणी बना हुआ है।

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