|
||||||
|
कानपुर/पुणे, 9 अप्रैल 2026: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर (आईआईटी कानपुर) के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ऑन एडवांस्ड टेक्नोलॉजीज फॉर मॉनिटरिंग एयर-क्वालिटी इंडिकेटर्स (ATMAN-CoE) ने हाल ही में, पुणे के होटल शेराटन ग्रैंड में “स्मार्ट सेंसिंग एंड डिजिटल इंटेलिजेंस फॉर क्लीन एयर एंड गुड हेल्थ” विषय पर एक अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला का सफलतापूर्वक आयोजन किया।
इस कार्यशाला वायु प्रदूषण और उसके सार्वजनिक स्वास्थ्य पर बढ़ते प्रभाव जैसे वैश्विक स्तर की गंभीर चुनौतियों पर विचार-विमर्श करने के लिए प्रमुख अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों, नीति-निर्माताओं, शोधकर्ताओं, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों और विकास सहयोगियों को एक मंच पर लाया। कार्यशाला में वायु गुणवत्ता निगरानी में अत्याधुनिक प्रगति को रेखांकित किया गया, जिसमें उपग्रह डेटा, नियामक प्रणालियों और कम लागत वाले सेंसरों को एकीकृत करने वाले हाइब्रिड मॉनिटरिंग नेटवर्क, साथ ही आर्टफिशल इन्टेलिजन्स (AI) आधारित पूर्वानुमान और निर्णय-सहायता प्रणालियाँ शामिल रहे। कार्यशाला का एक प्रमुख आकर्षण मोबाइल रियल-टाइम सोर्स अपॉर्शनमेंट (RTSA) प्रयोगशाला के वर्चुअल रियलिटी अनुभव का शुभारंभ रही, जिसके साथ स्वदेशी मशीन लर्निंग-संयुक्त कणीय पदार्थ (पार्टिकुलेट मैटर) सेंसरों के प्रदर्शन भी किए गए। कार्यशाला के दौरान कई महत्वपूर्ण ज्ञान उत्पाद भी जारी किए गए, जो नीति निर्माण और कार्यान्वयन में सहायता करेंगे। इनमें हाइब्रिड एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग नेटवर्क पर एक गाइडबुक, डायनेमिक हाइपरलोकल एयर क्वालिटी सोर्स अपॉर्शनमेंट (DHSA) के लिए एक व्यावहारिक कार्यान्वयन मार्गदर्शिका, लखनऊ और कानपुर में वायु गुणवत्ता प्रबंधन के लिए डेटा-आधारित ढांचे पर एक नीति संक्षेप, तथा बिहार में घरेलू ऊर्जा परिवर्तन पर एक नीति नोट शामिल हैं। कार्यशाला में सरकार, शोध संस्थानों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के कई प्रमुख नेताओं ने उद्घाटन और मुख्य वक्तव्य दिए। वक्ताओं ने विज्ञान आधारित वायु गुणवत्ता प्रबंधन को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने विशेष रूप से भारत जैसे तेजी से शहरीकरण वाले क्षेत्रों में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए समेकित, डेटा-आधारित और बड़े स्तर पर लागू किए जा सकने वाले समाधानों की जरूरत बताई। कार्यक्रम में कई विषयगत पैनल चर्चाएं भी आयोजित की गईं। इन चर्चाओं में वायु गुणवत्ता नीति में जन-जागरूकता और ओपन डेटा की भूमिका, परिवहन, ऊर्जा और स्वास्थ्य क्षेत्रों के बीच समन्वय की आवश्यकता, तथा सैटेलाइट मॉनिटरिंग से लेकर सड़क स्तर की सेंसिंग तकनीकों तक अंतरराष्ट्रीय ज्ञान आदान-प्रदान जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। इन चर्चाओं में यह स्पष्ट हुआ कि वायु गुणवत्ता में स्थायी सुधार के लिए वैश्विक सहयोग, डेटा की पारदर्शिता और स्थानीय स्तर पर प्रभावी कदम बेहद आवश्यक हैं। कार्यशाला ने शोध, नीति और उसके कार्यान्वयन के बीच की दूरी को कम करने का भी प्रयास किया। इस दौरान ATMAN-CoE द्वारा विकसित बड़े पैमाने पर सेंसर तैनाती, हाइपरलोकल वायु गुणवत्ता विश्लेषण, AI आधारित पूर्वानुमान मॉडल और शासन के लिए डिजिटल निर्णय सहायता प्रणालियों को प्रस्तुत किया गया। कार्यशाला में प्रतिभागियों ने एक्सपीरियंस पैवेलियन और विभिन्न तकनीकी प्रदर्शनों में भी हिस्सा लिया, जिससे अकादमिक संस्थानों, सरकार, उद्योग और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के बीच सहयोग और साझेदारी को बढ़ावा मिला। इस कार्यशाला से उम्मीद है कि शहरों और राज्यों में स्मार्ट सेंसिंग तकनीकों और डिजिटल इंटेलिजेंस उपकरणों को अपनाने की गति बढ़ेगी, साथ ही वायु गुणवत्ता प्रबंधन के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग भी मजबूत होगा। विभिन्न क्षेत्रों के हितधारकों को एक मंच पर लाकर इस कार्यशाला ने स्वच्छ हवा और बेहतर सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए नवाचार आधारित समाधानों को आगे बढ़ाने में आईआईटी कानपुर की अग्रणी भूमिका को फिर से स्थापित किया। आईआईटी कानपुर के बारे में 1959 में स्थापित, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर को भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय महत्व के संस्थान के रूप में मान्यता प्राप्त है। विज्ञान और इंजीनियरिंग शिक्षा में उत्कृष्टता के लिए प्रसिद्ध, आईआईटी कानपुर ने अनुसंधान और विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इसका 1,050 एकड़ का हरा-भरा परिसर शैक्षणिक और अनुसंधान संसाधनों से समृद्ध है। संस्थान में 20 विभाग, तीन अंतर्विषयी कार्यक्रम, 27 केंद्र और तीन विशेष स्कूल हैं, जो इंजीनियरिंग, विज्ञान, डिजाइन, मानविकी और प्रबंधन जैसे क्षेत्रों को समाहित करते हैं। 570 से अधिक पूर्णकालिक फैकल्टी और 9,500 से अधिक छात्रों के साथ, आईआईटी कानपुर नवाचार और शैक्षणिक उत्कृष्टता में अग्रणी बना हुआ है। |
|
|||||